"मेरे ब्रदर कि दुल्हन" जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि इस फिल्म में क्या होने वाला होगा, शायद यशराज फिल्म्स ने फिल्म का शीर्षक भी इसलिए ऐसा रखा हो जिससे की लोग इस रिश्ते के अजीब रूप के बारे में चर्चा करे या आपत्ति करे. आखिर दोनों ही स्थिति में फायदा तो फिल्म के collection को ही होना है.फिल्म की पब्लिसिटी में कोई कमी नहीं की गई, कुछ लोगो को इस बात से आपत्ति हो सकती है कि कैसे कोई अपनी होने वाली भाभी के साथ इश्क कर सकता है, अपने भाई को कैसे धोखा दे सकता है, परन्तु फिल्म देखते समय घटनाक्रम इतनी तेजी से चलते है कि ये सब बाते सोचने का वक़्त नहीं मिलता.
लव( अली अब्बास जाफ़र) और कुश(इमरान खान ) दोनों भाई है, इमरान खान अपने बड़े भाई की शादी के लिए परफेक्ट लड़की ढूढने निकलता है, इत्तफाक से उसकी मुलाकात कटरीना से होती है, जिससे वो 5 साल पहले मिला था, इन 5 सालो में कटरीना बहुत बदल जाती है और इमरान उसे अपने भाई के लिए पसंद कर लेता है. शादी कि तैयारिया शुरू हो जाती है, लन्दन से अली जाफ़र इंडिया आने वाला होता है, पर कटरीना चाहती है कि शादी से पहले 2 दिन वो खुल कर मौज मस्ती करे, और इमरान खान उसकी मौज मस्ती में उसका साथ देता है और ज्यादातर समय कटरीना के साथ गुजारता है. अली जाफ़र के इंडिया आने के बाद अली और कटरीना एक दुसरे के साथ समय बिताते है, पर कटरीना और इमरान को एक दुसरे के साथ बिताये पल बहुत याद आते है, उन्हें अहसास हो जाता है कि वो एक दूसरे को प्यार करने लगे है. दोनों प्लान बनाते है और ऐसी परिस्थितिया पैदा कर देते है कि सबकी मर्जी से उनकी शादी हो जाती है.
अली जाफ़र ने फिल्म का स्क्रीनप्ले भी लिखा है और निर्देशन भी किया है इसलिए पूरी फिल्म उनके कण्ट्रोल में रहती है, कहानी भटकती नहीं है, पहले हाफ में कहानी बड़ी तेजी से चलती है इंटरवल के बाद कुछ देर बाद फिर से कहानी कि स्पीड बढ़ जाती है, दर्शको के मनोरंजन का स्तर बना रहता है, इमरान और कटरीना के प्लान को दिलचस्प और कॉमेडी से भरा हुआ दिखाया जाता है, कटरीना द्वारा भागकर शादी करने योजना पर इमरान द्वारा पिता की इज्ज़त और होने वाली बदनामी के कारण मना करना अच्छा लगता है
परिस्थितिजन्य हास्य होने से फिल्म बहुत मनोरंजक लगती है, कटरीना का रोल प्रमुख है, जिसको उन्होंने अच्छी तरह से निभाया है, ये बाकी सभी कलाकारों ने भी अच्छी एक्टिंग की है, पूरी फिल्म में एक कॉमेडी टच बना रहता है, लगता नहीं की ये अली अब्बास ज़फर की पहली फिल्म है.
फिल्म के संगीत से भी फिल्म को फायदा मिला है, टाइटल सॉंग, छूमंतर, इश्क रिस्क अच्छी धुनें है जिन्हें गुनगुनाते हुए दर्शक सिनेमा हॉल से बहार निकलेंगे.
संक्षेप में कहा जाये तो हलके फुल्के मनोरंजन के लिए फिल्म को देखा जाना चाहिए.
3 /5
द्वारा -
मनेन्द्र यादव, दिल्ली
लव( अली अब्बास जाफ़र) और कुश(इमरान खान ) दोनों भाई है, इमरान खान अपने बड़े भाई की शादी के लिए परफेक्ट लड़की ढूढने निकलता है, इत्तफाक से उसकी मुलाकात कटरीना से होती है, जिससे वो 5 साल पहले मिला था, इन 5 सालो में कटरीना बहुत बदल जाती है और इमरान उसे अपने भाई के लिए पसंद कर लेता है. शादी कि तैयारिया शुरू हो जाती है, लन्दन से अली जाफ़र इंडिया आने वाला होता है, पर कटरीना चाहती है कि शादी से पहले 2 दिन वो खुल कर मौज मस्ती करे, और इमरान खान उसकी मौज मस्ती में उसका साथ देता है और ज्यादातर समय कटरीना के साथ गुजारता है. अली जाफ़र के इंडिया आने के बाद अली और कटरीना एक दुसरे के साथ समय बिताते है, पर कटरीना और इमरान को एक दुसरे के साथ बिताये पल बहुत याद आते है, उन्हें अहसास हो जाता है कि वो एक दूसरे को प्यार करने लगे है. दोनों प्लान बनाते है और ऐसी परिस्थितिया पैदा कर देते है कि सबकी मर्जी से उनकी शादी हो जाती है.
अली जाफ़र ने फिल्म का स्क्रीनप्ले भी लिखा है और निर्देशन भी किया है इसलिए पूरी फिल्म उनके कण्ट्रोल में रहती है, कहानी भटकती नहीं है, पहले हाफ में कहानी बड़ी तेजी से चलती है इंटरवल के बाद कुछ देर बाद फिर से कहानी कि स्पीड बढ़ जाती है, दर्शको के मनोरंजन का स्तर बना रहता है, इमरान और कटरीना के प्लान को दिलचस्प और कॉमेडी से भरा हुआ दिखाया जाता है, कटरीना द्वारा भागकर शादी करने योजना पर इमरान द्वारा पिता की इज्ज़त और होने वाली बदनामी के कारण मना करना अच्छा लगता है
परिस्थितिजन्य हास्य होने से फिल्म बहुत मनोरंजक लगती है, कटरीना का रोल प्रमुख है, जिसको उन्होंने अच्छी तरह से निभाया है, ये बाकी सभी कलाकारों ने भी अच्छी एक्टिंग की है, पूरी फिल्म में एक कॉमेडी टच बना रहता है, लगता नहीं की ये अली अब्बास ज़फर की पहली फिल्म है.
फिल्म के संगीत से भी फिल्म को फायदा मिला है, टाइटल सॉंग, छूमंतर, इश्क रिस्क अच्छी धुनें है जिन्हें गुनगुनाते हुए दर्शक सिनेमा हॉल से बहार निकलेंगे.
संक्षेप में कहा जाये तो हलके फुल्के मनोरंजन के लिए फिल्म को देखा जाना चाहिए.
3 /5
द्वारा -
मनेन्द्र यादव, दिल्ली

thik hai.....
ReplyDelete