Friday, 14 October 2011

Azaan- Movie Review

दिवाली के पहले के एक दो हफ्ते फिल्म बिजनेस के लिए अच्छे नहीं माने जाते, इस वक़्त कोई भी निर्माता अपनी फिल्म को रिलीज़ करने से बचता है, क्योंकि दिवाली की तैयारियों में सभी व्यस्त रहते है. पर कुछ छोटी बजट की फिल्मों के लिए दर्शकों तक पहुँचने का ये सही मौका होता है क्योंकि इस वक़्त अच्छे थियेटर खाली मिलते है.  इस हफ्ते 5 फिल्मे रिलीज़ हुई  है अजान, मुझसे फ्रेंडशिप करोगी, माय फ्रेंड पिंटू, जो डूबा सो पार,और मोड़. इन सभी को एक दूसरे से थोडा बहुत नुक्सान तो होगा ही, पर अजान और मुझसे फ्रेंडशिप करोगी के नाम ज्यादा उभरकर आते है,

बात करते है अजान की,  रौ में कम करने वाला एक आर्मी ऑफिसर अजान खान (सचिन जोशी) एक बहादुर इंसान है, जिसे हम वन मैन आर्मी कह सकते है, जो एक अंतर्राष्ट्रीय मिशन पर है, एक डॉक्टर जो पहले सीआईए  का एजेंट था, एक अबोला नामक वाइरस के जरिये दुनिया में तबाही मचाना चाहता है, वो अपना निशाना भारत को बनाता है, और अजान खान किस तरह से उसका सपना चकनाचूर करता है, ये बड़े ही स्टाइलिश लुक में प्रकाश चड्डा द्वारा निर्देशित की गई फिल्म में दिखाया गया है,

फिल्म की खासियत इसकी सिनेमेटोग्राफी, स्टाइलिश लुक, लोकेशन आदि है. पर पूरी फिल्म इतनी तेज गति से चलती है की दर्शक फिल्म से अंत तक नहीं जुड़ पता. दर्शक कहानी के अनुसार जिस सीन की उम्मीद करता है उससे एक कदम आगे का सीन दिखाया जाता है, हर किरदार भाग रहा है , तकनीकी बातें हो रही है, मशीनों के द्वारा काम चल रहा है, अलग अलग देशों की लोकेशन दिखाई गई है, इन सबका इतना ओवरडोज दिया गया है और इस तरह से दिखाया गया है कि दर्शक कन्फ्यूज हो जाते है, फिल्म कि एडिटिंग भी कमजोर है, दो सीन के बीच में जुडाव नजर नहीं आता. फिल्म की हीरोइन केंडिस वाउचर प्रभावित करती है और छोटे से रोल में फिल्म का ग्लैमर बढाती है बल्कि, पर नायक के साथ प्रेम कहानी फीकी सी नजर आती है.

 इस तरह की अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाले हीरो के रोल में कोई अंतर्राष्ट्रीय ना सही पर बड़ा स्टार होना चाहिए था,  सचिन जोशी में स्टारों वाली बात नहीं है, उनकी एक्टिंग भी कमजोर है, डायलोग डिलीवरी भी ठीक नहीं है,  इसलिए वे इस रोल में फिट नहीं होते. आर्य बब्बर और रविकिशन ओवर एक्टिंग करते दिखे. अपने फिल्मांकन और तकनीकी रूप से फिल्म होलीवुड की फिल्मों का मुकाबला करती है, पर कमजोर स्क्रीनप्ले, एडिटिंग और स्टारकास्ट की वजह से फिल्म उस उंचाई पर नहीं पहुँच पाती.

संक्षेप में कहा जाये तो  फिल्म बहुत एकाग्रता की मांग करती है.
स्टार 1 .5
द्वारा
मनेन्द्र यादव ,

Saturday, 8 October 2011

Rascals- Movie Review

डेविड धवन ने अपनी कॉमेडी फिल्मों से हमेशा दर्शकों को गुदगुदाया है, पर न जाने क्यों उनकी फिल्मों में वो पहले जैसी बात नहीं रही, डेविड कि कॉमेडी  फ़िल्में भले ही तर्कहीन होती हो पर दर्शकों का बहुत उम्दा मनोरंजन तथा हंसने के लिए मजबूर करती है, जिस विषय पर रास्कल्स बनाई गई है, उसी विषय पर डेविड धवन ने  गोविंदा और अनिल कपूर को लेकर 'दीवाना मस्ताना' तथा सलमान और अक्षय को लेकर 'मुझसे शादी करोगी' जैसी सुपर हिट फिल्मों का निर्देशन किया था. वही निर्देशक और वही विषय होने के बावजूद भी ये फिल्म 'दीवाना मस्ताना' और 'मुझसे शादी करोगी' से कोसो दूर है, एक अच्छी कॉमेडी फिल्म के लिए सिचुएशन, एक्टिंग, टाईमिंग, संवाद बहुत जरुरी होते है, पर इस फिल्म में हर चीज कि थोड़ी थोड़ी कमी है.
फिल्म में कहानी और स्क्रिप्ट बेदह कमजोर है,  चेतन (संजय दत्त ) और भगत (अजय देवगन)  दो छोटे मोटे चोर है, दोनों ही एक अमीर लड़की (कंगना ) को पटाने कि कोशिश करते है. कंगना के करीब जाने और उससे चिपकने के लिए ऊंटपटांग हरकते करते है.ये स्पष्ट नहीं है कि कंगना कौन है तथा दोनों को कंगना के पैसो में ज्यादा दिलचस्पी है या उसकी खूबसूरती में. उसके  पूरी फिल्म बैंकोक के एक सेवन स्टार होटल में शूट की गयी है, होटल के हर हिस्से में कोई न कोई सीन शूट किया गया है,  कई फिल्मे बिना स्क्रिप्ट और कहानी के भी अच्छे निर्देशन और और प्रस्तुतीकरण की वजह से दर्शकों द्वारा पसंद की जाती है, पर इस फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत घटिया है,फिल्म में अर्जुन रामपाल भी नजर आते है पर उनके पास करने को कुछ ज्यादा नहीं था. फिल्म में अंत में दर्शकों को जरा सा चौकाया गया है, पर ये काफी नहीं है, नई हीरोइन लीसा हेडन ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, आइटम नंबर में प्रभावित करती है, सतीश कौशिक, चंकी पाण्डेय, अनिल धवन भी नजर आते है.
लगता है कि दर्शक अब संजू बाबा को कॉमेडी फिल्मों में नहीं देखना चाहते , तभी उनकी इस साल 'डबल धमाल', 'चतुर सिंह 2 स्टार' को दर्शकों ने पसंद नहीं किया   संजय दत्त इस फिल्म के निर्माता है तो उन्हें तो फिल्म में होना ही था, पर इस किरदार में वे अब फिट नहीं बैठते, अब उन्हें कंगना जैसी हीरोइनों के साथ रोमांस करते देखना अजीब लगता है, अजय देवगन ने अच्छा काम किया है और फिल्म कि कमियों कि कवर करने कि पूरी कोशिश भी की है, फिल्म में विशाल शेखर का संगीत औसत है,
संक्षेप में कहा जाये तो  फिल्म से ज्यादा उम्मीद लगाना बेकार है, फिल्म का कोई भी हिस्सा सशक्त नहीं है.
स्टार 2 /5

मनेन्द्र यादव 
द्वारा
मनेन्द्र यादव