जब से बॉलीवुड में दबंग और सिन्घम में सौ करोड़ से ज्यादा का बिज़नस किया है तबसे लगता है सभी दक्षिण भारतीय फिल्मों के रिमेक बनाने में जुट गए है, ताज़ा फिल्म 'फ़ोर्स' भी दक्षिण भारतीय फिल्म 'काखा काखा' का हिंदी रिमेक है ,जिसे निर्देशित किया है निशिकांत कामत ने. पर ये फिल्म दबंग और सिन्घम से कोसों दूर है . हिंदी सिनेमा की सबसे सामान्य कहानी यानी कि एक ईमानदार, बहादुर और नेक पुलिस ऑफिसर की एक दुष्ट खूंखार अपराधी से भिडंत होना और आखिरी में नायक का खलनायक को मार गिराना, फोर्स की कहानी भी कुछ इसी तरह की है.
एसीपी यशवर्धन ( जॉन अब्राहिम ) एक ईमानदार, बहादुर इंसान है, जो कि किसी तरह के रिश्तो में नहीं उलझना चाहता क्योकि उसका मानना है कि रिश्तो से इंसान कमजोर हो जाता है , जिससे दुश्मन उसकी कमजोरी का फायदा उठा सकता है, इसलिए वह लड़कियों से भी दूर रहता है,जिसके कारण उसके साथी यश को सूखा पेड़ कहते है इसके बावजूद भी माया ( जेनेलिया डिसूजा ) उसका दिल जीत लेती है और यश को माया से प्यार हो जाता है. विष्णु (विद्युत् जमवल) नाम का अपराधी एक मुखबिर के जरिये सूचना देकर अपने दृग्स और स्मगलिंग के धंधे में अपने प्रतिद्वंदी को जॉन के द्वारा मरवा देता है, इस बात का यश को पता चलते ही वो विष्णु को पकड़ने में लग जाता है, एक माल में दृग्स का लें दें करते समय विष्णु का बड़ा भाई (मुकेश ऋषि ) यश और उसके साथियों अतुल , कमलेश और अन्य के हाथों मारा जाता है जाता है, जिसके कारण पुलिस डिपार्टमेंट इन चारों ऑफिसर्स को सस्पेंड कर देता है, विष्णु अपने बड़े भाई की मौत का बदला लेना चाहता है, फिर शुरू होता है, इन चारों ऑफिसर्स और विष्णु का लुका छिपी का खेल. और अंत में विष्णु किस तरह मारा जाता है. ये फिल्म में एक्शन के साथ दिखाया गया है,
फिल्म का पहला हाफ रोमांटिक है ,जिसमे जेनेलिया और जॉन का प्रेम प्रसंग दिखाया है , लडकियों से सामान्यता दूर रहने वाले जॉन को जेनेलिया अपनी प्यारी और मासूम बातों से प्यार करने को मजबूर कर देती है, इस हिस्से में कुछ अच्छे सीन देखने को मिलते है, दूसरे हाफ में रोमांस गायब हो जाता है, एक्शन शुरू हो जाता है, पर कहानी सधी हुई तब से लगती है जब से विष्णु, जॉन के घर पर हमला करता है, उससे पहले तक की कहानी सिर्फ खाली जगह को भरने जैसी लगती है, एक्शन फिल्म में अच्छा है, कुछ सीन दर्शकों को पसंद आ सकते है जैसे गली के गुंडों का तेजाब डालने वाला सीन, विष्णु और जॉन का पहला सामना.जॉन का चेहरा भावहीन रहता है जो इस तरह के कैरेक्टर के लिए उपयुक्त है , जेनेलिया ने जॉली गर्ल का किरदार खूब निभाया है, विष्णु जब जब स्क्रीन पर आते है अच्छा लगता है उन्होंने स्टंट भी अच्छे किये है , जॉन की बॉडी का खूब प्रदर्शन किया गया है, निर्देशक को स्क्रिप्ट का साथ नहीं मिला , इस तरह की कहानी का दर्शकों को पसंद आना मुश्किल है , फिल्म का संगीत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो पाया है.
संक्षेप में कहा जाये तो इस फिल्म के बजाय कोई और फिल्म देखना ज्यादा ठीक है
स्टार 1 .5 द्वारा
मनेन्द्र यादव



