दिवाली के पहले के एक दो हफ्ते फिल्म बिजनेस के लिए अच्छे नहीं माने जाते, इस वक़्त कोई भी निर्माता अपनी फिल्म को रिलीज़ करने से बचता है, क्योंकि दिवाली की तैयारियों में सभी व्यस्त रहते है. पर कुछ छोटी बजट की फिल्मों के लिए दर्शकों तक पहुँचने का ये सही मौका होता है क्योंकि इस वक़्त अच्छे थियेटर खाली मिलते है. इस हफ्ते 5 फिल्मे रिलीज़ हुई है अजान, मुझसे फ्रेंडशिप करोगी, माय फ्रेंड पिंटू, जो डूबा सो पार,और मोड़. इन सभी को एक दूसरे से थोडा बहुत नुक्सान तो होगा ही, पर अजान और मुझसे फ्रेंडशिप करोगी के नाम ज्यादा उभरकर आते है,
बात करते है अजान की, रौ में कम करने वाला एक आर्मी ऑफिसर अजान खान (सचिन जोशी) एक बहादुर इंसान है, जिसे हम वन मैन आर्मी कह सकते है, जो एक अंतर्राष्ट्रीय मिशन पर है, एक डॉक्टर जो पहले सीआईए का एजेंट था, एक अबोला नामक वाइरस के जरिये दुनिया में तबाही मचाना चाहता है, वो अपना निशाना भारत को बनाता है, और अजान खान किस तरह से उसका सपना चकनाचूर करता है, ये बड़े ही स्टाइलिश लुक में प्रकाश चड्डा द्वारा निर्देशित की गई फिल्म में दिखाया गया है,
फिल्म की खासियत इसकी सिनेमेटोग्राफी, स्टाइलिश लुक, लोकेशन आदि है. पर पूरी फिल्म इतनी तेज गति से चलती है की दर्शक फिल्म से अंत तक नहीं जुड़ पता. दर्शक कहानी के अनुसार जिस सीन की उम्मीद करता है उससे एक कदम आगे का सीन दिखाया जाता है, हर किरदार भाग रहा है , तकनीकी बातें हो रही है, मशीनों के द्वारा काम चल रहा है, अलग अलग देशों की लोकेशन दिखाई गई है, इन सबका इतना ओवरडोज दिया गया है और इस तरह से दिखाया गया है कि दर्शक कन्फ्यूज हो जाते है, फिल्म कि एडिटिंग भी कमजोर है, दो सीन के बीच में जुडाव नजर नहीं आता. फिल्म की हीरोइन केंडिस वाउचर प्रभावित करती है और छोटे से रोल में फिल्म का ग्लैमर बढाती है बल्कि, पर नायक के साथ प्रेम कहानी फीकी सी नजर आती है.
इस तरह की अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाले हीरो के रोल में कोई अंतर्राष्ट्रीय ना सही पर बड़ा स्टार होना चाहिए था, सचिन जोशी में स्टारों वाली बात नहीं है, उनकी एक्टिंग भी कमजोर है, डायलोग डिलीवरी भी ठीक नहीं है, इसलिए वे इस रोल में फिट नहीं होते. आर्य बब्बर और रविकिशन ओवर एक्टिंग करते दिखे. अपने फिल्मांकन और तकनीकी रूप से फिल्म होलीवुड की फिल्मों का मुकाबला करती है, पर कमजोर स्क्रीनप्ले, एडिटिंग और स्टारकास्ट की वजह से फिल्म उस उंचाई पर नहीं पहुँच पाती.
बात करते है अजान की, रौ में कम करने वाला एक आर्मी ऑफिसर अजान खान (सचिन जोशी) एक बहादुर इंसान है, जिसे हम वन मैन आर्मी कह सकते है, जो एक अंतर्राष्ट्रीय मिशन पर है, एक डॉक्टर जो पहले सीआईए का एजेंट था, एक अबोला नामक वाइरस के जरिये दुनिया में तबाही मचाना चाहता है, वो अपना निशाना भारत को बनाता है, और अजान खान किस तरह से उसका सपना चकनाचूर करता है, ये बड़े ही स्टाइलिश लुक में प्रकाश चड्डा द्वारा निर्देशित की गई फिल्म में दिखाया गया है,
फिल्म की खासियत इसकी सिनेमेटोग्राफी, स्टाइलिश लुक, लोकेशन आदि है. पर पूरी फिल्म इतनी तेज गति से चलती है की दर्शक फिल्म से अंत तक नहीं जुड़ पता. दर्शक कहानी के अनुसार जिस सीन की उम्मीद करता है उससे एक कदम आगे का सीन दिखाया जाता है, हर किरदार भाग रहा है , तकनीकी बातें हो रही है, मशीनों के द्वारा काम चल रहा है, अलग अलग देशों की लोकेशन दिखाई गई है, इन सबका इतना ओवरडोज दिया गया है और इस तरह से दिखाया गया है कि दर्शक कन्फ्यूज हो जाते है, फिल्म कि एडिटिंग भी कमजोर है, दो सीन के बीच में जुडाव नजर नहीं आता. फिल्म की हीरोइन केंडिस वाउचर प्रभावित करती है और छोटे से रोल में फिल्म का ग्लैमर बढाती है बल्कि, पर नायक के साथ प्रेम कहानी फीकी सी नजर आती है.
इस तरह की अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाले हीरो के रोल में कोई अंतर्राष्ट्रीय ना सही पर बड़ा स्टार होना चाहिए था, सचिन जोशी में स्टारों वाली बात नहीं है, उनकी एक्टिंग भी कमजोर है, डायलोग डिलीवरी भी ठीक नहीं है, इसलिए वे इस रोल में फिट नहीं होते. आर्य बब्बर और रविकिशन ओवर एक्टिंग करते दिखे. अपने फिल्मांकन और तकनीकी रूप से फिल्म होलीवुड की फिल्मों का मुकाबला करती है, पर कमजोर स्क्रीनप्ले, एडिटिंग और स्टारकास्ट की वजह से फिल्म उस उंचाई पर नहीं पहुँच पाती.
संक्षेप में कहा जाये तो फिल्म बहुत एकाग्रता की मांग करती है.
स्टार 1 .5
द्वारा
मनेन्द्र यादव ,

movie is not good
ReplyDeleteabhi tak dekhi nahi
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