निर्देशक मनीष शर्मा की " बैंड बाजा बारात" के अच्छे बिज़नस को देखते हुए, यश कैंप ने पूरी टीम को उपहार स्वरुप एक और फिल्म बनाने का मौका दिया. फिल्म का प्रमोशन भी जमकर किया गया जैसा की आजकल हर फिल्म की अच्छी ओपनिंग के लिए जरुरी हो गया है,
फिल्म में रिक्की बहल (रणवीर सिंह) एक बहरूपिया है जो की नाम, रूप बदल कर भारत के कई शहरों में लड़कियों को अपने जाल में फंसाता है, और उनसे लाखों रूपये की ठगी करता है, लडकियां अपना पैसा वापस लेने और बदला लेने की नीयत से एक बहुत तेज तर्रार लड़की ईशिका (अनुष्का) को तैयार करती है, फिर कैसे रिक्की बहल सुधर जाता है, ये फिल्म में दिखाया गया है,
फिल्म का पहला भाग थोडा मनोरंजक है, क्योंकि उसमे रिक्की बहल, लड़कियों को बेवकूफ बना कर ठगता है, जिस तरह बड़ी आसानी से लड़कियों और उनके परिवार वालों को बेवकूफ बनाता है वो कुछ गले से नहीं उतरते. यहाँ फिल्म के मनोरंजक के नाम पर ज्यादा छूट ले ली गई है, सेकंड हाफ में फिल्म बोरियत की शिकार हो जाती है, मनोरंजन का स्तर गिरने लगता है, फिल्म खिची खिची सी लगने लगती है, दर्शकों में फिल्म से दूर होने लगते है, अंत भी दर्शकों को निराश कर सकता है, जब लड़कियां रिक्की को बेवकूफ बनाने की कोशिश करती है, उन दृश्यों को ठीक से नहीं लिखा गया. स्क्रीनप्ले भी निराश करता है, निर्देशक ने दर्शकों को खुश करने के चक्कर में रोमांस दिखाया गया है, जो की जबरदस्ती का ठूसा हुआ लगता है.
अनुष्का शर्मा को जिस तरह तेज तर्रार दिखाया है उस तरह के सीन नहीं लिखे गए, रणवीर का किरदार पहली फिल्म (बैंड बाजा बारात) और इस फिल्म में लगभग एक सा ही नजर आता है, फिल्म के अंत में जिस तरह रणवीर का किरदार शांत हो जाता है और सुधर जाता है, वहा पर ज्यादा मेहनत नहीं की गयी. उसके बुरे आदमी से भले बननी की कहानी दिलचस्प नहीं है.
रणवीर ने अच्छा प्रयास किया है, अनुष्का कही कही ओवर एक्टिंग का शिकार हो गई, परिणिति चोपड़ा, दीपानिता शर्मा, अदिति शर्मा ने ठीक काम किया है, जिसमे परिणिति चोपड़ा के कुछ दृश्य याद रहते है, सलीम सुलेमान ने फिल्म का संगीत अच्छा दिया है, जिसमे " आदत से मजबूर" गाना याद रहता है,
संक्षेप में कहा जाये तो " लेडिस वर्सेस रिक्की बहल" में मनोरंजन की उम्मीद करना बेकार है.
स्टार 1.5 /5मनेन्द्र यादव

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