Friday, 6 January 2012

Players- Movie Review

निर्देशक द्वय अब्बास मस्तान बोलीवुड में बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों के लिए जाने जाते है, ' खिलाडी', 'बाजीगर' , 'हमराज', 'दरार', ' एतराज ', ' रेस' आदि उनकी द्वारा निर्देशित फ़िल्में है, अपनी फिल्मों में वे होलीवुड की फिल्मों का विशुद्ध भारतीयकरण कर देते है, पर इस बार उन्होंने होलीवुड की 1969 में बनी फिल्म ' द इटालियन जॉब' के हिंदी रीमेक के अधिकार खरीद कर ' प्लेयर्स ' बनाई है,

चार्ली (अभिषेक बच्चन ),  रशिया से रोमानिया भेजे जा रहे 10 हज़ार करोड़ रूपये के सोने को चुराने का प्लान बनाता है, पर ये बहुत ही मुश्किल काम है जिसको चार्ली अकेला नहीं कर सकता इसलिए उसको कुछ साथियों की जरुरत पड़ती है, जिसके लिए उसका गुरु विक्टर दादा (विनोद खन्ना)  उसके लिए एक टीम बनाने में मदद करता है,  जिसमे ब्लास्ट एक्सपर्ट बिलाल (सिकंदर खेर ), जादूगर रोनी (बोबी देओल), स्पाइडर (नील नितिन मुकेश), रिया (विपाशा बासु ), नैना (सोनम ) और मेकअप एक्सपर्ट सनी (ओमी वैद्य) है, पूरी टीम इस चोरी को वारदात को अंजाम देती  है, चोरी के बाद कोई एक सदस्य गद्दारी करता है, उस गद्दार से बाकी के सदस्य सोना वापस लाने में कामयाब होते है. ये घटनाक्रम बहुत से छोटे छोटे घटनाओं को जन्म देते है, जो की फिल्म को दिलचस्प बनाते है,

फिल्म के स्क्रीनप्ले में कुछ दृश्य ऐसे रखे गए है, जो की ओरिजिनल फिल्म में नहीं थे, जिनकी वजह से दर्शकों को थोड़ी बोरियत हो सकती है,कहानी बेहतरीन है पर , फिल्म का स्क्रीनप्ले में कई खामियां है, लगता है, कि जुगराज ने बेमन से स्क्रीनप्ले लिखा है,  प्रीतम का  संगीत अच्छा है, तथा लोकप्रिय हो चुका है, फिल्म में स्टाइल और लोकेशन होलीवुड स्तर की है, बीच में कुछ जगह पर फिल्म बोझिल हो जाती है, पर ट्रेन से  चोरी का सीन बहुत ही खूबसूरत फिल्माया गया है, फिल्म के एडिटर का काम भी बहुत मुश्किल रहा होगा. काफी मेहनत करनी पड़ी होगी,

अभिषेक बच्चन ने इस फिल्म में 'धूम ', 'धूम-2 ", ब्लफमास्टर', 'दस', और ' दम मारो दम ' के जैसा ही स्टाइलिश रोल किया है, कई जगह बहुत प्रभावी नजर आते है, , बोबी देओल का किरदार ठीक से नहीं लिखा गया,उनके कुछ सीन जबरदस्ती घुसाए हुए लगते है,  सोनम और सिकंदर ने निराश किया, बिपाशा का अभिनय अच्छा है और उनकी खूबसूरती का फिल्म में सही उपयोग किया गया है, नील मुकेश का काम प्रभावी है, ओमी वैद्य ने कुछ जगह दर्शकों को हंसाया. विनोद खन्ना के करने के लिए कुछ नहीं था. 

और अंत में कहना चाहिए कि ये  फिल्म अब्बास मस्तान की पिछली फिल्मों से उन्नीस है, पर स्टाइलिश प्रस्तुतीकरण और रोचक कहानी की वजह से एक बार देखी जा सकती है.
स्टार 2 /5
मनेन्द्र यादव

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